कविता / फणीश्वर नाथ रेणु

0
65

यह फागुनी हवा 

यह फागुनी हवा

मेरे दर्द की दवा
ले आई…ई…ई…ई
मेरे दर्द की दवा!आंगन ऽ बोले कागा
पिछवाड़े कूकती कोयलिया
मुझे दिल से दुआ देती आई
कारी कोयलिया-या
मेरे दर्द की दवा
ले के आई-ई-दर्द की दवा!वन-वन
गुन-गुन
बोले भौंरा
मेरे अंग-अंग झनन
बोले मृदंग मन–
मीठी मुरलिया!
यह फागुनी हवा
मेरे दर्द की दवा ले के आई
कारी कोयलिया!
अग-जग अंगड़ाई लेकर जागा
भागा भय-भरम का भूत
दूत नूतन युग का आया
गाता गीत नित्य नया
यह फागुनी हवा…!

साभार – रेणु रचनावली , राजकमल प्रकाशन , दिल्ली।