कविता / कुमार मुकुल की पांच कविताएं

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समुद्र के आंसू , सभ्यता और जीवन , परिदृश्य के भीतर जैसे काव्य संग्रह के रचयिता कुमार मुकुल मूलतः भोजपुर (बिहार) के निवासी है। हिन्दी काव्य जगत में इनकी विशिष्ट पहचान है। हिन्दी का समाज और इनके प्रशंसक कुमार मुकुल के नाम से ही जानते हैं। वैसे इनका मूल नाम अमरेन्द्र कुमार मुकुल है। प्रगतिशील धारा के सशक्त कवि की पांच महत्वपूर्ण कविताये पढ़ें डा. रंजना कण्ठ की विशेष टिप्पणी के साथ। – संपादक

हिन्दी साहित्य-जगत मे ‘कुमार मुकुल’ एक ऐसी शख़्शियत हैं, जिन्होंने अपनी कविताओं में जीवन के तमाम रंगों को छुआ है। उनकी कविताओं में हम जन-सामान्य की जीवन-शैली से लेकर दर्शन-शास्त्र तक के गूढ़ रहस्य को पाते हैं।  “भाव की सुंदरता शारीरिक सुंदरता से कहीं बढ़कर होती है” कुमार मुकुल ने अपनी कविताओं में कई स्थानों पर इस तरह की अभिव्यक्ति की है। अपनी एक कविता “महानगर फेसबुक और शर्माता बच्चा” में कुमार मुकुल ने फुटपाथी जीवन का जीवंत चित्रण किया है कि किस तरह सड़क के किनारे फुटपाथ और पेड़ों-गमलों के सहारे गृहस्थी जिलाई जा रही है। बच्चे चाहे अमीर घर के हों या गरीब घरों के सब में बाल सुलभ चपलता होती है और कवि उसमें सौंदर्य देखता है और उसे आधुनिकता के सहारे भुनाने की तात्‍‍कालिक ईच्छा  को अभिव्यक्ति करता है। कुमार मुकुल की दृष्टि व्यापक है। सामान्य प्रसंगों को भी वह आत्मिक और आध्यात्मिक बना देने की ताकत रखते हैं ।  उनकी कविताएं जन-सामान्य की भावनाओं का जीवंत चित्रण करती हैं। इन कविताओं में हम जिस कवि रूप को देखते हैं, उसके पीछे कवि का लंबा जीवन संघर्ष छिपा दिखता है। – डा. रंजना कण्ठ

 

१ . हम दोनों कितने सुंदर हैं!”
कि हमदोनों कितने सुंदर हैं …
चिंतित है वह
कि पहले सी सुंदर ना रही
जानता हूँ मैं
कि पहले सा सुर्खरू ना रहा
भविष्यवाणी है नास्त्रेदमस की
के 2018 के बाद दुनिया
सुन्दर नहीं रह जाएगी
और 2025 के बाद
रह जायेंगे लोग गिनती के
पर सोचता हूँ मैं
कि 2025 के बाद के जनशून्य और
खाली-खुली दुनिया में
हम घूमेंगे साथ-साथ
हाथों में हाथ डाले
तब शायद
उस समय का दुनियावी सन्नाटा कहे
कि हमदोनों कितने सुंदर हैं।

२ . महानगर फेसबुक और शर्माता बच्चा

महानगर के मध्य
एक चौडी सडक है
जिसके आजू-बाजू
दो कम चौडी सडकें हैं
शेयर के आटो से उतरकर
इसी सडक से गुजरता हूं मैं
इस सडक पर पेड हैं कई
बडे बडे गमले भी रखवाए हैं सरकार ने
इससे जुडे फुटपाथ पर
जिस पर रंग-फूल पुते हैं
हालांकि इनमें लगाए गए फूल सूख गये हैं
पर इसके आस-पास
खेलते हैं फूल से बच्चे
इन पेडों पर दिखते हैं
कुछ गटठर बंधे हुए
जिनमें बंधा होता है
इस नहीं दिखते घर का साजो-सामान
कुछ घरेलू सामान इन गमलों में
और उसके आस-पास भी टिका होता है
सुबह-शाम इन गमलों के पास ही
माएं पकाती रहती हैं खाना
और बच्चे खेलते रहते हैं
गमलों-चूल्हों-सडकों के आर-पार
मैं गुजर रहा होता हूं
तो कभी-कभी भागता कोई बच्चा
पीछे चले आता है दौडता
तब सोचता हूं मैं
कितनी कलात्मक होगी
इस बच्चे की तस्वीर
फेसबुक के लिए
फिर खुद पर शर्मिंदा होता
बढ जाता हूं आगे
कुछ दूर पीछे दौड
लौट जाता है बच्चा भी
शर्माता सा।

३. सबसे ताकतवर आदमी की आँखें –

दुनिया के सबसे ताकतवर आदमी का नाम
ऐसा कातर सा टिन टिन – पिन पिन क्योंघ है
वह खल्वा ट क्योंि है
क्याल उसकी ताकत इस मामले में
उसके काम नहीं आती
उसकी निगाहें ऐसी कठोर क्यों हैं
क्या यह किसी और के ताकतवर हो जाने
या दिखने का भय है
जो उसे निर्जीवों सा सख्तर बना रहा
उसकी निगाहों में निर्भीकता आ पाएगी कभी
जैसी ईसा या गांधी या बुद्ध् की आंखों में
लोगों ने देखी थी अभयदान देती सी
और खुद को आश्वथस्तद और सुरक्षित पाया था
सबसे कमजोर आदमी के मुकाबले
क्या आग उसे धीमे जलाएगी
या जब बिजली गिरेगी तो
उसकी ताकत का कुछ लिहाज करेगी
या धरती कांपेगी तो वह अपने राष्ट्रऔ
या शहर या भवन को
इतिकथा के मुरलीधर की तरह
अपनी उंगली पर उठा सकेगा
क्या वह सबसे ताकतवर पैदा हुआ था
या सबसे ताकतवर मरेगा
सबसे ताकतवर होना
समय के सापेक्ष एक बिंदु का
कितना छोटा हिस्सा है
क्या इसकी गणना संभव है।

४ . अहा अहो महा महो
अहा अहो महा महो
अपने छुद्र हाथों से
चरण मुझ विराट के
भाँति भाँति गहो
अहा अहो महा महो
कुछ भी ना कहो
सुनो गुनो पर चुनो
मुझ बज्रकपाट को
प्रस्तर आकाश में फिर
लघु सर अपना धुनो
अहा अहो…
५ . संतन को अब शूटर सो काम –
संतन को भयो अब शूटर सो काम
बिसार दियो कब को राम रहिमान
सिंघस्त मा जम के कट्टा चमकायो
झटपट कुछ साधु लुढ़कायो
आसाराम सो परमानंद तक
बलात्कार सेक्स मा कमायो खूब नाम