कविता / अंकिता जैन की पांच कविताएँ

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अंग्रेजी साहित्य की छात्रा रही अंकिता जैन को कविता से गहरा जुड़ाव है। मध्य प्रदेश के कस्बाई शहर अशोक नगर में जन्मीं अंकिता स्कूल जीवन से कविता लेखन कर रही है। साधारण परिवार में पैदा हुई नवोदित कवयित्री स्कूल में पढ़ाती भी है। एम. ए. की शिक्षा प्राप्त कर चुकी नवोदित लेखिका अध्यापन के साथ आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहती है। इनकी दो कविता संग्रह ‘मेरा मन एक परिंदा’ और ‘कुछ बाकी था’ का प्रकाशन हो चुका है। कविता लेखन के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के लिए इन्हें वुमन अचीवर और नवांकुर सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। प्रस्तुत है अंकिता जैन द्वारा भोले मन से रची गई पांच रचनाएं डा. मधुलिका बेना पटेल की विशेष समीक्षात्मक टिप्पणी के साथ। मधुलिका , फणीश्वरनाथ रेणु डॉट कॉम के संपादकीय कार्यकारिणी से भी संबद्ध हैं। – संपादक

                                भोले मन की कविता

‘अंकिता की कविता भोले मन की कविता है। भागमभाग में बालपन कहीं खो सा गया है। जीवन की स्वाभाविक सरसता जैसे गायब ही हो गयी है। ‘बालपन’ शीर्षक कविता उन्हीं अटखेलियों को खोजती है, जो बारिश में भींगती थी और चुलबुलेपन से सराबोर थी।‘ख्वाहिश’ कविता में अपनी तलाश है, भीड़ से खुद को अलगाना है और अपने इरादों के लिए लगन के साथ खड़े होना है। स्वार्थ से सराबोर समाज में एक फ़रिश्ते की बड़ी शिद्दत से चाह है ‘फ़रिश्ता’ कविता । कोई ऐसा हो जिसे सिर्फ इंसानियत की पहचान हो । ‘कोई अपना सा’ कविता में किसी अपने की चाह है, उसकी राह सुनहरी करने की कामना कोमल शब्दों में घुल कर आती है । ‘वे राहें छूट गयी’ कविता पीछे छूटे को फिर से खोजती है। जो उम्मीदें पहले कभी जगी थी, जिन राहों से होकर मंजिल पा लेने की तमन्ना थी वे कहीं गुम हो गयी। – डॉ. मधुलिका बेन पटेल , सहायक प्राध्यापक, हिन्दी विभाग, तमिलनाडु केन्द्रीय विश्वविद्यालय, तिरुवारूर ।

अंकिता जैन की पांच कविताएँ

1. बालपन

वो मीठी बातें
अठखेलियां
कभी ठिठोली
कभी चुलबुलापन
वो बारिश
मेँ भीग जाना
और
बहाने बनाना
जहाँ हर वक्त
मस्ती
शैतानियाँ
और
अपनापन
सच था वो बालपन ।

2. ख्वाहिश

मेरी ख्वाहिशें बहुत
कम है
उम्मीदों में
बस जीत की
सरगम है
चाहत बस इतनी सी है
जिसको
दिल से चाहूँ
बस उसे पाऊँ
कुछ करके दिखाऊँ
मेरे हौसले रुके नहीं
इरादे झुके नहीं
भीड़ से
बस खुद को ढूंढ़ लाऊं।

3. फरिश्ता

दूसरों के आंसू देख
जिसका दिल रोता हो
मदद करने
जो आगे बढ़ता हो
काश हर मन ऐसा
फरिश्ता हो ।
बिना स्वार्थ
जो
बने किसी का सहारा
हर किसी के लिए
विश्वास की धारा ।
निभाए
रिश्ता इंसानियत का
काश
हर मन हो
ऐसा फरिश्ता।

4. कोई अपना सा

भीड़ में
परदेसी वो
अपना सा लगा
साया बन
यूं साथ चला
जैसे हो कोई सगा
बहुत सी बातें उसकी
याद आती हैं
झुकी आंखें उसकी
बहुत कुछ कह जाती हैं
वो बहुत अच्छा है
बच्चों सा सच्चा है
मेरी ख्वाहिश है
उसकी हर ख्वाहिश पूरी हो
प्यार भरी
उसकी राह
सुनहरी हो ।

5. वे राहें छूट गयी

कभी जिन राहों से
आना-जाना था
आज हम उनसे रूठ गये
वे राहें छूट गयी
सपना देखा था
कभी
कि वहाँ से चलकर
अपनी मंजिल
पा लेंगे
पर
वे सपने
अब टूट गये
और वे राहें छूट गई।