Home पार्कर 51

पार्कर 51

फणीश्वरनाथ रेणु का दुर्लभ रिपोर्ताज / जै गं ...

बाढ़ की विभीषिका का दंश बिहार लंबे अरसे से झेल रहा है। बिहार के लिए बाढ़ आजादी...

कविता /  फणीश्वर नाथ रेण

गत मास का साहित्य!!                           ...

कविता / फणीश्वर नाथ रेणु

मिनिस्टर मंगरू  कहाँ गायब थे मंगरू?'-किसी ने चुपके से पूछा। वे बोले- यार, गुमनामियाँ जाहिल मिनिस्टर था। बताया काम...

कविता / फणीश्वर नाथ रेणु

यह फागुनी हवा  यह फागुनी हवा मेरे दर्द की दवा ले आई...ई...ई...ई मेरे दर्द की दवा!आंगन ऽ बोले कागा पिछवाड़े कूकती कोयलिया मुझे...

कविता

सुंदरियो !                                 ...

कविता 

बहुरूपिया                                 ...

कविता / फणीश्वर नाथ रेणु

     इमरजेंसी  इस ब्लाक के मुख्य प्रवेश-द्वार के समने हर मौसम आकर ठिठक जाता है सड़क के उस पार चुपचाप दोनों...

कविता

                             जागो मन के...

कविता

अपने ज़िले की मिट्टी से फणीश्वर नाथ रेणु  कि अब तू हो गई मिट्टी सरहदी इसी से हर सुबह कुछ...

कविता

 साजन ! होली आई है! फणीश्वरनाथ रेणु  साजन! होली आई है! सुख से हँसना जी भर गाना मस्ती से मन को बहलाना पर्व...