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लेख / अनंत – रेणु और रिपोर्ताज

      उपन्यास के तरह ही रिपोर्ताज भी यूरोपीय साहित्य की देन है। उपन्यास का उदभव रेनेशां...

साक्षात्कार / ४४ साल पहले फणीश्वरनाथ रेणु से सुरेंद्र किशोर की...

’ यह आंदोलन तो जीने की चेष्टा है ।' लगभग 44 साल पहले 4 नवंबर 1974 को जेपी...

फणीश्वरनाथ रेणु का दुर्लभ रिपोर्ताज / जै गं ...

बाढ़ की विभीषिका का दंश बिहार लंबे अरसे से झेल रहा है। बिहार के लिए बाढ़ आजादी...

लेख – संजीव चन्दन / ‘रेणु के उपन्यासों में दलित स्त्री...

बिहार के गया में जन्में संजीव चंदन चर्चित युवा संपादक हैं। स्त्री के सवालों को लेकर हर...

कहानी

         तीसरी कसम उर्फ मारे गए गुलफाम                ...

कहानी – फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ / लाल पान की बेगम

                           'क्यों बिरजू की माँ,...

अस्मिता विमर्श

देशज अस्मिता के पहले रचनाकार हैं रेणु                      ...

कविता / फणीश्वर नाथ रेणु

यह फागुनी हवा  यह फागुनी हवा मेरे दर्द की दवा ले आई...ई...ई...ई मेरे दर्द की दवा!आंगन ऽ बोले कागा पिछवाड़े कूकती कोयलिया मुझे...

कविता / फणीश्वर नाथ रेणु

मिनिस्टर मंगरू  कहाँ गायब थे मंगरू?'-किसी ने चुपके से पूछा। वे बोले- यार, गुमनामियाँ जाहिल मिनिस्टर था। बताया काम...

रिपोर्ताज़ – फणीश्वरनाथ ‘रेणु’  / पुरानी कहानी : नया पाठ

बंगाल की खाड़ी में डिप्रेशन - तूफान - उठा! हिमालय की किसी चोटी का बर्फ पिघला और तराई...