कविता / नागार्जुन

भोजपुर 1 यहीं धुआँ मैं ढूँढ़ रहा था यही आग मैं खोज रहा था यही गंध थी मुझे चाहिए बारूदी छर्रें की...

कविता / नागार्जुन

मायावती  मायावती मायावती दलितेन्द्र की छायावती छायावती जय जय हे दलितेन्द्र प्रभु, आपकी चाल-ढाल से दहशत में है केन्द्र जय जय हे दलितेन्द्र आपसे...

कविता / नागार्जुन

मोर न होगा ...उल्लू होंगे ख़ूब तनी हो, ख़ूब अड़ी हो, ख़ूब लड़ी हो प्रजातंत्र को कौन पूछता, तुम्हीं...

कविता / अमृता प्रीतम 

                     साल मुबारक जैसे सोच की कंघी में से एक...